बिल्व पत्र
बेल(बिल्व) की उत्पत्ती के संबंध में स्कंध पुराण में लिखा है कि एक बार देवी पार्वती ने अपने ललाट से पसीना पोंछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ। इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तना में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पत्तियों में पार्वती जी, फूलों में गौरी तथा फलों में कात्यायनी निवास करती हैं।
बिल्व पत्र का महत्व
बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध (famous) यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ (tree) पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक, बहुत पवित्र तथा समृद्धि देने वाला है। बेल के पत्ते शंकर जी (shiv shanker ji) का आहार माने गए हैं, इसलिए भक्त लोग बड़ी श्रद्धा से इन्हें महादेव के ऊपर चढ़ाते हैं। शिव की पूजा के लिए बिल्व-पत्र बहुत ज़रूरी माना जाता है। शिव-भक्तों का विश्वास है कि पत्तों (leaves) के त्रिनेत्रस्वरूप् तीनों पर्णक शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं।
छह से लेकर 21 पत्तियों वाले बिल्व पत्र
ये मुख्यतः नेपाल (nepal) में पाए जाते हैं। पर भारत (india) में भी कहीं-कहीं मिलते हैं। जिस तरह रुद्राक्ष कई मुखों वाले होते हैं उसी तरह बिल्व पत्र भी कई पत्तियों वाले होते हैं।
बिल्वाष्टक और शिव पुराण
बिल्व पत्र का भगवान शंकर के पूजन (poojan) में विशेष महत्व (special importance) है जिसका प्रमाण शास्त्रों में मिलता है। बिल्वाष्टक और शिव पुराण में इसका स्पेशल उल्लेख है। अन्य कई ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। भगवान शंकर एवं पार्वती को बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है।
कांटों में भी हैं शक्तियाँ
कहा जाता है कि बेल वृक्ष के कांटों में भी कई शक्तियाँ समाहित हैं। यह माना जाता है कि देवी महालक्ष्मी का भी बेल वृक्ष में वास है। जो व्यक्ति शिव-पार्वती की पूजा बेलपत्र अर्पित कर करते हैं, उन्हें महादेव और देवी पार्वती दोनों का आशीर्वाद मिलता है। ‘शिवपुराण’ में इसकी महिमा विस्तृत रूप में बतायी गयी है।
बिल्व पत्र के प्रकार- बिल्व पत्र चार प्रकार के होते हैं
१- अखण्ड बिल्व पत्र
२- तीन पत्तियों के बिल्व पत्र
३- छ: से इक्कीस पत्तियों तक के बिल्व पत्र
४- श्वेत बिल्व पत्र
इन सभी बिल्व पत्रों का अपना-अपना महत्व है।
१-अखंड बिल्व पत्र
इसका विवरण बिल्वाष्टक में इस प्रकार है – ‘‘अखंड बिल्व पत्रं नंदकेश्वरे सिद्धर्थ लक्ष्मी’’। यह अपने आप में लक्ष्मी सिद्ध है। एकमुखी रुद्राक्ष के समान ही इसका अपना विशेष महत्व है। यह वास्तुदोष का निवारण भी करता है। इसे गल्ले में रखकर नित्य पूजन करने से व्यापार में चैमुखी विकास होता है।
२-तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र
इस बिल्व पत्र के महत्व का वर्णन भी बिल्वाष्टक में आया है जो इस प्रकार है- ‘‘त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम् त्रिजन्म पाप सहारं एक बिल्वपत्रं शिवार्पणम’’ यह तीन गणों से युक्त होने के कारण भगवान शिव को प्रिय है। इसके साथ यदि एक फूल धतूरे का चढ़ा दिया जाए, तो फलों (fruits) में बहुत वृद्धि होती है।
३-श्वेत बिल्व पत्र
जिस तरह सफेद सांप, सफेद टांक, सफेद आंख, सफेद दूर्वा आदि होते हैं उसी तरह सफेद बिल्वपत्र भी होता है। यह प्रकृति (nature) की अनमोल देन है। इस बिल्व पत्र के पूरे पेड़ पर श्वेत पत्ते पाए जाते हैं। इसमें हरी पत्तियां नहीं होतीं। इन्हें भगवान शंकर को अर्पित करने का विशेष महत्व है।
भगवान शंकर का प्रिय-
भगवान शंकर को बिल्व पत्र बेहद प्रिय है। भांग, धतूरा और बिल्व पत्र से प्रसन्न होने वाले केवल शिव जी ही हैं। शिवरात्रि के अवसर पर बिलवपत्रों से विशेष रूप से शिवजी की पूजा की जाती है। तीन पत्तियों वाले बिल्व पत्र आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
मां भगवती को बिल्व पत्र-
श्रीमद देवी भागवत मे स्पष्ट वर्णन है, कि जो व्यक्ति मां भगवती को बिल्व पत्र अर्पित करता है वह कभी भी किसी भी परिस्थती में दुखी नहीं हो सकता। उसे हर तरह की सिद्धि प्राप्त होती है और वह कई जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है। और वह भगवान भोलेनाथ का प्रिय भक्त हो जाता है।उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ती होती है।
ये भी है श्रीफल-
नारियल से पहले बिल्व को श्रीफल माना जाता था और माना जाता था कि यह लक्ष्मी जी का प्रिय फल है। प्राचीन समय में बिल्व को लक्ष्मी जी और सम्पत्ती का प्रतीक मानकर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए बिल्व पत्र की आहूती दी जाती थी। प्राचीन काल से ही बिल्व पत्र पूज्यनीय रहा है।
यह एक रामबाण दवा भी है-
धार्मिक दृष्टी से पवित्र होने के कारण इसे मंदिरों के पास लगाया जाता है। बिल्व वृक्ष की तासीर शीतल होती है। गर्मी से बचने के लिए इसके फल का शर्बत बड़ा ही लाभकारी होता है। यह शर्बत कुपचन, आंखों की रोशनी में कमी, पेट में कीड़े और लू लगने जैसी समस्यओं से निजात पाने के लिए उत्तम है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण बिल्व की पत्तियों में टैनिन, लौह, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नेशियम जैसे रसायन पाए जाते हैं।
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