उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से 60 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है पुरी। पुरी को जगन्नाथ भगवान के विश्व प्रसिद्ध मंदिर के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग ने अपने शासनकाल में करवाया था, जिसे बाद में उनके पोते अनंगभीम देव ने 1174 में पून: उस रूप में बनवाया, जैसा आज हम इसे देखते हैं। अनंतवर्मन नें ही कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर भारत के विश्व प्रसिद्ध चार धामों में से एक है। प्रतिवर्ष पूरी दुनिया से लोग जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा में हिस्सा लेने आते हैं।
जगन्नाथ मंदिर, जगन्नाथ भगवान का मंदिर है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की नीम की लकड़ी से बनी प्रतिमा होती है, जिसे हर 12 से 19 साल के बीच एक खास दिन बदला जाता है। इसके लिए एक विशेष प्रकार के नीम के पेड़ को काटकर पुरी भेजा जाता है, जहाँ पर उसे तराश कर उससे भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा बनायी जाती है। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी पुरानी प्रतिमा में से एक विशेष पदार्थ जिसे दिव्य पदार्थ कहते हैं, निकालकर नयी प्रतिमा में स्थापित करते हैं। किसी को भी नहीं पता कि वो पदार्थ क्या है, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि वो भगवान बुद्ध के अवशेष हैं, जिन्हे आज तक सम्भाल कर रखा गया है। नयी प्रतिमा में दिव्य पदार्थ को स्थापित करने के बाद पुरानी प्रतिमा को मंदिर में ही किसी निश्चित जगह पर पूरे सम्मान के साथ दफना दिया जाता है
इसके निर्माण के बाद से अब तक इस मंदिर पर 18 बार आक्रमण हो चुका है। पहली बार इस मंदिर पर आक्रमण रक्तवाहू नें किया था। मुगल बादशाह औरंगजेब नें भी इस पर आक्रमण किया था, जिसके बाद यह कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन 1707 में औरंगजेब की मृत्यू के बाद इसे पुन: खोल दिया गया था।
स्वामी जगन्नाथ मंदिर के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं-
1- मंदिर के ऊपर से किसी पक्षी का न उड़ना
कहा जाता है कि इस मंदिर के ऊपर से कभी भी न तो कोई पक्षी और न ही कोई विमान उड़ता है। किसी को नहीं पता की एेसा क्यों होता है। कुछ लोग मानते हैं कि ऐसा भगवान की उपस्थिति के कारण होता है। मगर कुछ लोग इसे केवल एक कोरी कल्पना मानते हैं।
2-
जगन्नाथ मंदिर, जगन्नाथ भगवान का मंदिर है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की नीम की लकड़ी से बनी प्रतिमा होती है, जिसे हर 12 से 19 साल के बीच एक खास दिन बदला जाता है। इसके लिए एक विशेष प्रकार के नीम के पेड़ को काटकर पुरी भेजा जाता है, जहाँ पर उसे तराश कर उससे भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा बनायी जाती है। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी पुरानी प्रतिमा में से एक विशेष पदार्थ जिसे दिव्य पदार्थ कहते हैं, निकालकर नयी प्रतिमा में स्थापित करते हैं। किसी को भी नहीं पता कि वो पदार्थ क्या है, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि वो भगवान बुद्ध के अवशेष हैं, जिन्हे आज तक सम्भाल कर रखा गया है। नयी प्रतिमा में दिव्य पदार्थ को स्थापित करने के बाद पुरानी प्रतिमा को मंदिर में ही किसी निश्चित जगह पर पूरे सम्मान के साथ दफना दिया जाता है
इसके निर्माण के बाद से अब तक इस मंदिर पर 18 बार आक्रमण हो चुका है। पहली बार इस मंदिर पर आक्रमण रक्तवाहू नें किया था। मुगल बादशाह औरंगजेब नें भी इस पर आक्रमण किया था, जिसके बाद यह कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन 1707 में औरंगजेब की मृत्यू के बाद इसे पुन: खोल दिया गया था।
![]() |
| स्वामी जगन्नाथ मंदिर |
स्वामी जगन्नाथ मंदिर के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं-
1- मंदिर के ऊपर से किसी पक्षी का न उड़ना
कहा जाता है कि इस मंदिर के ऊपर से कभी भी न तो कोई पक्षी और न ही कोई विमान उड़ता है। किसी को नहीं पता की एेसा क्यों होता है। कुछ लोग मानते हैं कि ऐसा भगवान की उपस्थिति के कारण होता है। मगर कुछ लोग इसे केवल एक कोरी कल्पना मानते हैं।
2-



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें