हिन्दु धर्म में 7 अमर व्यक्ति। जी हाँ हिन्दु धर्म ग्रंथो के मुताबिक हिन्दु धर्म में एेंसे सात व्यक्ति हैं जिन्हे अमरता का वरदान प्राप्त है। हिन्दु धर्म के ग्रंथों में एक श्लोक है जो इस प्रकार है-
अस्वत्थामा बलिर व्यासो हनुमानस्य च विभीषण:।
कृपाचार्या च परशुरामम् सपतईता चिरंजीवनम।।
इस श्लोक में कहा गया है, कि अस्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम ऐंसे सात व्यक्ति हैं जिन्हे चिरंजीव होने का वरदान प्राप्त है। इन लोगों के बारे में नीचे जानकारी दी जा रही है-
1- अस्वत्थामा- ये बात तो सब जॉनते हॉे कि अस्वत्थामा कोरवों और पांडवों के गुरू दोण और कृपाचार्य की बहिन कृपि के पुत्र थे, और महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। कहा जाता है कि इस युद्ध में और इस युद्ध के बाद केवल दो ही ऐंसे लोग थे जो जिंदा बचे थे। उनमें से एक कृपाचार्य थे और दूसरा था अस्वत्थामा। कहा जाता है कि अस्वत्थामा के पास एक मणि थी जिसे वह अपने माथे पर धारण करता था। अस्वत्थामा भगवान शिव का भक्त था और हथियारों का बहुत बड़ा जानकार था। कहा जाता है कि अस्वत्थामा 64 प्रकार की युद्धकला मे माहिर था। कुछ लोगों का मानना है कि वह कलयुग में द्वितीय व्यास और सप्तऋषि बनेगा। एक प्रचलित मान्यता के अनुसार अस्वत्थामा शिव जी के मंदिर पर प्रतिदिन फूल चढ़ाने के लिए जाता है, हालांकि आज तक किसी ने उसे वहां आते और फूल चढ़ाते हुए नहीं देखा।
2- बलि- बलि प्रहलाद का वंशज था बलि राक्षस होने के बावजूद धर्म में आस्था रखता था इसका साम्राज्य उत्तर में विंध्य से दक्षिण में केरल तक फैला था। इसके साम्राज्य की राजधानी केरल थी। इसके बारे में एक कहानी बहुत प्रचलित है, कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु बलि की परिक्षा लेने धरती पाए और उन्होने एक बालक का वेश बनाया। जब वो बलि के दरबार म्ं गए तो बलि नें उनसे कुछ भी मागनें को कहा। तब भगवान विष्णु नें जो कि एक बालक के रूप में थे बलि से तीन पग जगह देने को कहा, बलि ने उनकी बात मान ली और उन्हे तीन पग जगह नापने के लिए कहा, लेकिन जब उन्होने नापना शुरू किया तो उन्होने पृथ्वी और आकाश को केवल दो कदमों से नाप लिया और जब तीसरे पैर के लिए कोई जगह नहीं बची तब बलि नें उनसे कहा कि वे तीसरा पग उसके सिर पर रखें। भगवान नें उसका निवेदन स्वीकार कर लिया और तीसरा पैर उसके सिर पर रख दिया जिससे वो सीधा पाताल में पहुँच गया। भगवान ने बलि की इस दानवीरता से प्रसन्न होकर उसे अमरता का वरदान दिया।
2- बलि- बलि प्रहलाद का वंशज था बलि राक्षस होने के बावजूद धर्म में आस्था रखता था इसका साम्राज्य उत्तर में विंध्य से दक्षिण में केरल तक फैला था। इसके साम्राज्य की राजधानी केरल थी। इसके बारे में एक कहानी बहुत प्रचलित है, कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु बलि की परिक्षा लेने धरती पाए और उन्होने एक बालक का वेश बनाया। जब वो बलि के दरबार म्ं गए तो बलि नें उनसे कुछ भी मागनें को कहा। तब भगवान विष्णु नें जो कि एक बालक के रूप में थे बलि से तीन पग जगह देने को कहा, बलि ने उनकी बात मान ली और उन्हे तीन पग जगह नापने के लिए कहा, लेकिन जब उन्होने नापना शुरू किया तो उन्होने पृथ्वी और आकाश को केवल दो कदमों से नाप लिया और जब तीसरे पैर के लिए कोई जगह नहीं बची तब बलि नें उनसे कहा कि वे तीसरा पग उसके सिर पर रखें। भगवान नें उसका निवेदन स्वीकार कर लिया और तीसरा पैर उसके सिर पर रख दिया जिससे वो सीधा पाताल में पहुँच गया। भगवान ने बलि की इस दानवीरता से प्रसन्न होकर उसे अमरता का वरदान दिया।
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